असमान से गिरती बुँदो को देखकर नीचे जलती हुई आग ने अट्टहास किया और बोली ये छोटी बूँदे मेरा भला क्या बिगाडेगी ? परंतु बुँदो ने अपना गिरना नही रोका |और एक के बाद एक- बुँदे गिरती और देखते ही देखते आग को बुझने को विवश होना पडा| समुह की सफलता संख्या से नही ,सामूहिक संकल्प से सुनिश्चित होती है |
1 टिप्पणी:
बहुत सुंदर दीपक भाई
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