बुधवार, 21 अक्टूबर 2015

लघु कथा ( बुँदो का संकल्प)

                           

                                    



          असमान से गिरती बुँदो को देखकर नीचे जलती हुई  आग ने अट्टहास किया और बोली ये छोटी बूँदे मेरा भला क्या बिगाडेगी ?  परंतु बुँदो ने अपना गिरना नही रोका |और एक के बाद एक- बुँदे गिरती और देखते ही   देखते आग को बुझने को विवश होना पडा| समुह की सफलता संख्या से नही ,सामूहिक संकल्प से सुनिश्चित होती है |


              

1 टिप्पणी:

hindishabdshagar.blogspot.in ने कहा…

बहुत सुंदर दीपक भाई